इछचाये अपने आप पूरी हो जाती है Billi Jer (Cats Chord) से अगर व्यापार न चल पा रह हो यां जीवन में उन्नति न हो पा रही हो ,कई बार इर्षा के कारण कुछ लोग तंत्र प्रयोग कर देते हैं जिससे दूकान में ग्राहक नहीं आते यां कार्य सफल नहीं होते. इसलिए एक और प्रयोग दे रहा हूँ इन परस्थितियों में यह प्रयोग राम बाण की तरह असर करता है. बुधवार के दिन Billi Jer (Cats Chord) को स्थापित कर दें . इसपर कुमकुम या केसर का तिलक लगाये. और निम्न मंत्र का जप आसन में बैठ कर करें. ॐ नमो भगवती पद्मा श्रीम ॐ हरीम, पूर्व दक्षिण उत्तर पश्चिम धन द्रव्य आवे , सर्व जन्य वश्य कुरु कुरु नमः अगर दूकान न चल रही हो तो दूकान में किसी सुरक्षित स्थल में रख दे. इस प्राथना को करने वाले को कभी धन की याचना नहीं करनी पड़ती अपितु धन उसकी और स्वयं ही आकर्षित होता रहता है और धन-सम्पति, वशीकरण, शत्रु शमन मे व्यक्ति सशक्त हो जाता है l जिस व्यक्ति के पास यह होती है l उसे किसी बात कि कमी नहीं होती l उसकी लगभग सभी इछचाये पूर्ण हो जाती है ... यदि आप लगातार कर्जों से परेशान हों या व्यवसाय में बाधा आ रही हो, या किसी भी प्रकार आय में वृद्धि नहीं हो पा रही हो, तो एक Billi Jer (Cats Chord) रख लें व प्रत्येक पुष्य नक्षत्र में सिंदूर चढ़ाते रहें। ऐसा करने से आप की उपर्युक्त सभी समस्याएं दूर हो जाएंगी व शीघ्र ही फल की प्राप्ति होगी। और व्यवसाय बढ़ने लगेगा , अगर नौकरी में है तो तरकी का मार्ग बनेगा. इसे घर में रखने से सकारात्मक उर्जा का अनुभव होता है ! Contact For Buy : +91 9896153833Wednesday, 25 May 2016
Billi Jer (Cats Chord)
इछचाये अपने आप पूरी हो जाती है Billi Jer (Cats Chord) से अगर व्यापार न चल पा रह हो यां जीवन में उन्नति न हो पा रही हो ,कई बार इर्षा के कारण कुछ लोग तंत्र प्रयोग कर देते हैं जिससे दूकान में ग्राहक नहीं आते यां कार्य सफल नहीं होते. इसलिए एक और प्रयोग दे रहा हूँ इन परस्थितियों में यह प्रयोग राम बाण की तरह असर करता है. बुधवार के दिन Billi Jer (Cats Chord) को स्थापित कर दें . इसपर कुमकुम या केसर का तिलक लगाये. और निम्न मंत्र का जप आसन में बैठ कर करें. ॐ नमो भगवती पद्मा श्रीम ॐ हरीम, पूर्व दक्षिण उत्तर पश्चिम धन द्रव्य आवे , सर्व जन्य वश्य कुरु कुरु नमः अगर दूकान न चल रही हो तो दूकान में किसी सुरक्षित स्थल में रख दे. इस प्राथना को करने वाले को कभी धन की याचना नहीं करनी पड़ती अपितु धन उसकी और स्वयं ही आकर्षित होता रहता है और धन-सम्पति, वशीकरण, शत्रु शमन मे व्यक्ति सशक्त हो जाता है l जिस व्यक्ति के पास यह होती है l उसे किसी बात कि कमी नहीं होती l उसकी लगभग सभी इछचाये पूर्ण हो जाती है ... यदि आप लगातार कर्जों से परेशान हों या व्यवसाय में बाधा आ रही हो, या किसी भी प्रकार आय में वृद्धि नहीं हो पा रही हो, तो एक Billi Jer (Cats Chord) रख लें व प्रत्येक पुष्य नक्षत्र में सिंदूर चढ़ाते रहें। ऐसा करने से आप की उपर्युक्त सभी समस्याएं दूर हो जाएंगी व शीघ्र ही फल की प्राप्ति होगी। और व्यवसाय बढ़ने लगेगा , अगर नौकरी में है तो तरकी का मार्ग बनेगा. इसे घर में रखने से सकारात्मक उर्जा का अनुभव होता है ! Contact For Buy : +91 9896153833Tuesday, 3 May 2016
एक बड़ी गहन भ्रांति है कि हर आदमी यही सोचे चला जाता है कि दूसरे मरते हैं, मैं नहीं मरूंगा। तुमने महाभारत की कथा तो सुनी है न, कि पांडव प्यासे हैं, जंगल में भटक गए हैं। और एक झील पर पानी भरने पांच भाइयों में से एक भाई गया है। और जैसे ही झुका है पानी पीने को और पानी भरने को, एक यक्ष वृक्ष पर से आवाज दिया: रुक, या तो मेरे पांच प्रश्नों का उत्तर दे, या अगर पानी छुआ तो मौत घट जाएगी। मेरे पांच प्रश्नों का पहले उत्तर चाहिए। अगर ठीक उत्तर दिया तो ठीक, नहीं तो मृत्यु परिणाम होगा।पहला भाई इस तरह गिर गया, उत्तर नहीं दे पाया और पानी पीने की कोशिश की; प्यास ऐसी थी। दूसरा भाई और वही, तीसरा भाई और वही...। और अंत में युधिष्ठिर आए--चारों भाई कहां खो गए? देखा, चारों की लाशें पड़ी हैं झील के तट पर। चारों ने जिद्द की, उत्तर नहीं दे पाए फिर भी पानी पीने की जिद्द की। युधिष्ठिर झुके, यक्ष फिर बोला...। उसमें एक प्रश्न आज के काम का है; सारे प्रश्न अर्थपूर्ण थे, मगर एक प्रश्न यह था कि संसार में सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है? युधिष्ठिर ने कहा: सबसे बड़ा आश्चर्य यही है कि हम रोज लोगों को मरते देखते हैं, फिर भी यह भरोसा नहीं आता कि मैं मरूंगा!
यह ठीक उत्तर था। सबसे बड़ा आश्चर्य ताजमहल नहीं है, और सबसे बड़ा आश्चर्य इजिप्त के पिरामिड नहीं हैं, और न बेबीलोन का उलटा लटका हुआ गार्डन और न अलेग्जेन्ड्रिया का लाइट हाऊस। ये चमत्कार नहीं हैं, ये बड़े आश्चर्य नहीं हैं। सबसे गहन आश्चर्य यह है कि रोज मरते देखकर भी, रोज लोगों को मरते देखकर, रोज मृत्यु के प्रमाण देखकर भी यह भरोसा आता ही नहीं कि मैं मरूंगा! भरोसे की बात--यह प्रश्न ही नहीं उठता कि मैं मरूंगा। मन कहे चला जाता है, जैसे सदा कोई और मरता है, दूसरा मरता है।
Thursday, 28 April 2016
It is said of the Mother (in the Hymn to Her in the Mahakala-Samhita): "Thou art neither girl, nor maid, nor old. Indeed Thou art neither female nor male, nor neuter. Thou art inconceivable, immeasurable Power, the Being of all which exists, void of all duality, the Supreme Brahman, attainable in Illumination alone."
Vanakaam
ParaTan Inner Sakthi Yoga
ParaTan Inner Sakthi Yoga
Wednesday, 27 April 2016
मैं रूठी तुम भी रूठ गये
फिर मनाएगा कौन ?
आज दरार है, कल खाई होगी
फिर भरेगा कौन ?
मैं चुप, तुम भी चुप
इस चुप्पी को फिर तोडेगा कौन ?
बात छोटी को लगा लोगे दिल से,
तो रिश्ता फिर निभाएगा कौन ?
दुखी मैं भी और तुम भी बिछड़कर,
सोचो हाथ फिर बढ़ाएगा कौन ?
न मैं राजी, न तुम राजी,
फिर माफ़ करने का बड़प्पन दिखाएगा कौन ?
डूब जाएगा यादों में दिल कभी,
तो फिर धैर्य बंधायेगा कौन ?
एक अहम् मेरे, एक तेरे भीतर भी,
इस अहम् को फिर हराएगा कौन ?
ज़िंदगी किसको मिली है सदा के लिए ?
फिर इन लम्हों में अकेला रह जाएगा कौन ?
मूंद ली दोनों में से गर किसी दिन एक ने आँखें....
तो कल इस बात पर फिर
पछतायेगा कौन ?🍁
फिर मनाएगा कौन ?
आज दरार है, कल खाई होगी
फिर भरेगा कौन ?
मैं चुप, तुम भी चुप
इस चुप्पी को फिर तोडेगा कौन ?
बात छोटी को लगा लोगे दिल से,
तो रिश्ता फिर निभाएगा कौन ?
दुखी मैं भी और तुम भी बिछड़कर,
सोचो हाथ फिर बढ़ाएगा कौन ?
न मैं राजी, न तुम राजी,
फिर माफ़ करने का बड़प्पन दिखाएगा कौन ?
डूब जाएगा यादों में दिल कभी,
तो फिर धैर्य बंधायेगा कौन ?
एक अहम् मेरे, एक तेरे भीतर भी,
इस अहम् को फिर हराएगा कौन ?
ज़िंदगी किसको मिली है सदा के लिए ?
फिर इन लम्हों में अकेला रह जाएगा कौन ?
मूंद ली दोनों में से गर किसी दिन एक ने आँखें....
तो कल इस बात पर फिर
पछतायेगा कौन ?🍁
Thursday, 21 April 2016
Vashikran Mantra
Many of you may be going through some tough times at the moments. But remember, When you come out of the storm you won't be the same person that walked in. That's what the storm is all about. Yes, whatever phase of life Shiva puts you in, accept it cheerfully. Pray to him to enable you to fit into every situation happily and constantly thank Shiva for intervening in his own way. These hard times are the golden opportunities to think of HIM, to remember him and to draw close to him. It's due to forgetfulness that we are affected by one thing or another.#TheShivaTribe Know that In this material world, everyone is destined to suffer a certain amount of distress and enjoy a certain amount of happiness. The amount of happiness and distress is already predestined for every living entity. But your attitude towards your circumstances is a freedom that can never be taken away. You change your attitude and it changes your world. So tonight, Relax. Stop worrying. Know that whatever you are going through, Shiva has already figured it out for you. He already has all the solutions. Give all your problems to Shiva, he is much bigger than everything. He is your refuge and your strength. Turn all your worries to HIM. Dont allow the little things to distract you from seeing how BIG your Mahadev is !!! Love, light & peace ~ Boom Shankar!Shubh Ratri!
Sunday, 3 April 2016
Mahavidya CHINNAMASTA (chopped off head) The Self-Decapitated Goddess
To stop mind is liberation
Worship means
To liberate the desire for sensory input, cutting off the source of the movements of mind and reaching deep meditation (samadhi).
Mantra
SHRING HRING KLING AING
VAJRAVAIROCHNIYE HUNG HUNG PHAT SWAHA
Enhances
Willpower, vision, meditation, sexual abstinence, kundalini yoga, samadhi
Tuesday, 29 March 2016
"अस्तित्व के साथ जियो और चीजोें को खुद अपने आप घटने दो। यदि कोई तुम्हारा सम्मान करता है,तो यह उसका ही निर्णय है, तुम्हारा उससे कोई संबंध नही। यदि तुम उससे अपना संबंध जोड़ते हो,तो तुम असंतुलित और बेचैन हो जाओगे, और यही कारण है कि यहाँ हर कोई मनोरोगी है। और तुम्हारे चारों तरफ घिरे बहुत से लोग तुमसे यह अपेक्षाएँ कर रहे हैं कि तुम यह करो, वह मत करो। इतने सारे लोग और इतनी सारी अपेक्षाएँ और तुम उन्हे पूरा करने की कोशिश कर रहे हो। तुम सभी लोगों और उनकी सभी अपेक्षाओं को पूरा नही कर सकते। तुम्हारा पूरा प्रयास तुम्हे एक गहरे असंतोष से भर देगा और कोई भी संतुष्ट होगा ही नही। तुम किसी को संतुष्ट कर ही नही सकते, केवल यही संभव है कि केवल तुम स्वयम् ही संतुष्ट हो जाओ। और यदि तुम अपने से संतुष्ट हो गये, तब थोड़े से लोग तुमसे संतुष्ट होंगे, लेकिन इससे तुम्हारा कोई संबंध न हो।
तुम यहाँ किन्ही और लोगों की अपेक्षाओं को पूरा करने, उनके नियमों और नक्शों के अनुसार उन्हे संतुष्ट करने के लिये नही हो। तुम यहाँ अपने अस्तित्व को परिपूर्ण जीने के लिये आये हो। यही सभी धर्मों में सबसे बड़ा और पूर्ण धर्म है कि तुम अपने होने में परिपूर्ण हो जाओ । यही तुम्हारी नियति या मंजिल है, इससे च्युत नही होना है। इससे बढ़कर और कुछ मूल्यवान नही।
किसी का अनुगमन और अनुसरण न कर अपने अन्त: स्वर को सुनो। एक बार भी यदि तुमने अपने अन्त: स्वर का अनुभव कर लिया, तो फिर नियमों और सिद्धाँतों की कोई जरूरत रहेगी ही नही। तुम स्वयम् अपने आप में ही एक नियम बन जाओगे।"
तुम यहाँ किन्ही और लोगों की अपेक्षाओं को पूरा करने, उनके नियमों और नक्शों के अनुसार उन्हे संतुष्ट करने के लिये नही हो। तुम यहाँ अपने अस्तित्व को परिपूर्ण जीने के लिये आये हो। यही सभी धर्मों में सबसे बड़ा और पूर्ण धर्म है कि तुम अपने होने में परिपूर्ण हो जाओ । यही तुम्हारी नियति या मंजिल है, इससे च्युत नही होना है। इससे बढ़कर और कुछ मूल्यवान नही।
किसी का अनुगमन और अनुसरण न कर अपने अन्त: स्वर को सुनो। एक बार भी यदि तुमने अपने अन्त: स्वर का अनुभव कर लिया, तो फिर नियमों और सिद्धाँतों की कोई जरूरत रहेगी ही नही। तुम स्वयम् अपने आप में ही एक नियम बन जाओगे।"
Subscribe to:
Comments (Atom)


